भास्कर एक्सक्लूसिव इंटरव्यू: कैप्टन पंजाब में कांग्रेस को साफ करने में जुटे थे; अच्छे वक्त में नटवर सिंह जैसों ने मलाई खाई : हरीश रावत
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- The Captain Was Busy Cleaning Up The Congress In Punjab; In Good Times Natwar Singh Ate Cream, Now Raising Questions: Harish Rawat
नई दिल्ली13 घंटे पहलेलेखक: रवि यादव
पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह को सियासी चालबाजी में मात देकर किनारे लगाने वाले सीनियर कांग्रेस लीडर और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहे हरीश रावत का मानना है कि कैप्टन पंजाब में कांग्रेस का सफाया करने में जुटे थे। पंजाब में कांग्रेस को बचाए रखने के लिए मुख्यमंत्री को बदलना जरूरी था।
कांग्रेस में गांधी के परिवार के खिलाफ उठ रही आवाज पर उन्होंने कहा कि पार्टी के भीतर आवाज उठाना कोई गलत बात नहीं। उन्होंने कहा कि नटवर सिंह जैसे लोगों ने पार्टी के अच्छे समय में मलाई खाई और अब सवाल खड़े कर रहे हैं।
रावत का कहना है कि मोदी के सामने कांग्रेस के पास राहुल गांधी है। उन्होंने यह सभी बातें दैनिक भास्कर को दिए एक खास इंटरव्यू में कहीं। रावत ने और क्या कहा, आइये जानते हैं…
सवाल : आप अब तक पंजाब में जुटे रहे। उधर, आपके उत्तराखंड में चुनाव सिर पर आ गए। कहीं देर तो नहीं हो गई?
जवाब : मेरा मानना है कि यह देर आए दुरुस्त आए वाली बात है। कार्यकर्ता और समर्थक मेरी ताकत हैं। वो मेरी इस देरी को माफीनामा समझ कर ज्यादा ताकत लगा रहे हैं, ताकि देरी का असर पार्टी की चुनावी संभावनाओं पर न पड़े।
सवाल : पंजाब में मुख्यमंत्री बदलने के बाद भी विवाद खत्म नहीं हुआ, क्या अमरिंदर सिंह को हटाकर कांग्रेस ने चूक कर दी है?
जवाब : अमरिंदर सिंह को हटाने वाले और उन्हें अकाली दल की B टीम कहने वाले सभी विधायक कांग्रेस के थे। उन सभी का मानना था कि कैप्टन अकाली दल की तरफ झुकाव रखते हैं। उनके प्रशासनिक अधिकारी अकाली दल की ही सुनते हैं। कैप्टन चुनाव के समय उस तरह काम नहीं कर रहे थे जो एक मुख्यमंत्री को बतौर लीडर करना चाहिए। वो तो विपक्ष की भूमिका निभा रहे थे।
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कैप्टन साहब तो अपने फार्म हाउस से ही नहीं निकलते थे। उनके बारे में एक बात प्रचलित थी कि वो भाजपा के दबाव में हैं और पंजाब में कांग्रेस की हार सुनिश्चित करके जाना चाहते हैं। पार्टी ने उनको सुधरने का बहुत समय दिया। पंजाब में लागू करने के लिए 18 सूत्रीय कार्यक्रम भी दिया गया था। उसमें नशे की लत और कारोबार से जुड़े मामले भी शामिल थे, लेकिन वो लागू नहीं हुआ।
पंजाब में 43 विधायक विरोध में आ गए और कांग्रेस विधायक दल (CLP) की मीटिंग बुलाने की मांग करने लगे। इसलिए हमें CLP की मीटिंग बुलानी पड़ी। बैठक में कैप्टन अमरिंदर को भी आने के लिए कहा गया था, लेकिन उन्होंने पहले ही राज्यपाल को अपना इस्तीफा दे दिया। उन्होंने ऐसे हालात खुद पैदा किए कि कांग्रेस को बचाए रखने के लिए नया मुख्यमंत्री बनाना जरूरी था।
चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बनने का पूरे पंजाब ने स्वागत किया गया है। नवजोत सिंह सिद्धू को भी यह यह सोचना चाहिए पार्टी ने उन्हें इतना बड़ा पद दिया है। उन्हें सबका सहयोग करना चाहिए।
सवाल : उत्तर प्रदेश में कांग्रेस किस समीकरण के भरोसे है। वहां न कोई चेहरा न संगठन। केवल प्रियंका गांधी की सक्रियता काम आएगी?
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जवाब : हां, बिलकुल। प्रियंका गांधी को उत्तर प्रदेश की जनता एक विकल्प और एक नई हवा के झोंके के रूप में देख रही है। बेशक हमारी संगठनात्मक स्थिति उत्तर प्रदेश में कमजोर है, लेकिन जनता अक्सर इतिहास बनाती है। 1977 में जब कांग्रेस हारी थी तब जनता पार्टी के संगठन की स्थिति अच्छी नहीं थी, लेकिन जनता ने चाहा तो वो दो तिहाई बहुमत ले आए।
उत्तर प्रदेश लोगों को एहसास हो चुका है कि प्रियंका गांधी के साथ आने से वे पुराना गौरव प्राप्त कर सकते हैं।
सवाल : प्रियंका गांधी के चुनाव लड़ने की स्थिति साफ नहीं है, क्या इससे जनता को भ्रम नहीं होगा?
जवाब : प्रियंका गांधी दोनों में से कोई भी निर्णय लें। चुनाव लड़ें या न लड़ें। इससे कोई गुणात्मक अंतर नहीं आएगा, क्योंकि नेतृत्व उन्हीं का है। उनसे उत्तर प्रदेश में पार्टी को फायदा होगा। पार्टी का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है।
सवाल : भाजपा कहती है कि देश में मोदी का कोई विकल्प नहीं है। कांग्रेस मोदी के सामने किसे खड़ा कर सकती है?
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जवाब : उनका नाम राहुल गांधी है। उस नौजवान में वह क्षमता है। एक वैकल्पिक सोच है, जिसकी इस समय देश को जरूरत है। मोदी की सोच का ही परिणाम है कि देश की अर्थव्यवस्था चौपट है। बेरोजगारी चरम पर है। महंगाई बढ़ती जा रही है। देश की सीमाएं खतरे में दिखाई दे रही हैं।
अचानक भारत चारों तरफ से दुश्मनों से घिरा हुआ नजर आता है। इसका मतलब है कि मोदी एक अच्छी विदेश नीति बनाने में कामयाब नहीं रहे। पाकिस्तान और चीन पहले से दुश्मन थे, अब नेपाल को भी दूर कर दिया। भूटान जैसे देश भी हमारी मित्रता पर सवाल उठाने लगे हैं। देश इस समय उदासीन माहौल से घिर गया है।
सवाल : राहुल गांधी पर तो कांग्रेस के ही बड़े नेता सवाल खड़े करते हैं। G-23 से कांग्रेस कैसे निपटेगी?
जवाब : पार्टी के अंदर कोई बात कहना गलत नहीं है। अगर किसी ने वर्किंग कमेटी की बैठक बुलाने की मांग कर दी तो उसमें कोई गलत बात नहीं है। सभी ने वर्किंग कमेटी में राहुल गांधी के नेतृत्व की मांग की। किसी ने स्पष्ट कहा तो किसी ने स्पष्ट नहीं कहा, लेकिन सभी इस बात पर राजी हैं कि राहुल गांधी को नेतृत्व संभालना चाहिए। सोनिया गांधी की बात पर सभी ने सहमति जताई। उन्होंने कहा कि वो अंतरिम रूप से काम कर रही हैं। इस बात को सभी ने माना और सिर हिलाने और ताली बजाने वालों में आनंद शर्मा और गुलाम नबी आजाद भी शामिल थे ।
हम भाजपा की तरह नहीं हैं, जहां सवाल उठाना अपराध माना जाता है। कांग्रेस एक लोकतांत्रिक पार्टी है, किसी ने सवाल उठा भी दिया तो हम उसे एक प्रक्रिया का हिस्सा मानते हैं और उसका हल निकालते हैं।
सवाल : पूर्व केंद्रीय मंत्री नटवर सिंह ने कहा है कि कांग्रेस में अब लोकतांत्रिक प्रणाली नहीं बची है। सोनिया गांधी लगातार 21 वर्षों से अध्यक्ष हैं?
जवाब : नटवर सिंह तो केवल अपनी भड़ास निकाल रहे हैं। वो खुद कांग्रेसी है या नहीं, मुझे नहीं मालूम। ये वो लोग हैं जिन्होंने कांग्रेस के अच्छे समय में मलाई खाई और जब पार्टी कमजोर होने लगी तो सवाल उठाकर विपक्ष के हितों को साधने का काम कर रहे है। नटवर सिंह अपने पुराने इतिहास के साथ धोखा कर रहे हैं।
सवाल: कांग्रेस परिवारवाद के आरोप से कैसे निपटेगी? आपको नहीं लगता कि अध्यक्ष पद को लेकर कांग्रेस को अपने संविधान में बदलाव करना चाहिए।
जवाब : जब तक कांग्रेसियों का विश्वास सोनिया गांधी पर है वो हमारी पार्टी की अध्यक्ष बनी रहेंगी। यह आरोप लगाना कि कांग्रेस में केवल नेहरू परिवार है, जो अध्यक्ष बनता है, पूरी तरह बेमानी है। आधे से ज्यादा सालों तक पार्टी अध्यक्ष का पद गैर नेहरू परिवार के नेताओं ने संभाला है।
जब आजादी की लड़ाई में शायद ही कोई परिवार ऐसा रहा होगा जिसकी तीन-तीन पीढ़ियां एक साथ साथ जेल में रहीं। यह करिश्मा नेहरू परिवार ने दिखाया। पूरे देश में दूसरा कोई परिवार नहीं है जिसका एक सदस्य प्रधानमंत्री रहते हुए और दूसरा उससे हटने के बाद देश के दुश्मनों के हाथों मारा गया हो। बलिदान देने में नेहरू परिवार हमेशा ही आगे रहा है। इसलिए यह कहना कि कांग्रेस बलिदानी परिवार का सम्मान क्यों कर रही है, सही बात नहीं है।
सवाल: कई राज्यों में कांग्रेस सरकार को BJP ने बदल कर अपनी सरकार बनाई है। ऐसा कैसे संभव हो रहा है ?
जवाब : जब प्रधानमंत्री ही संविधान की धज्जियां उड़ाने लगे हैं। लोकतांत्रिक संस्थाएं कमजोर हो जाएं और उनकी सुरक्षा हासिल न रहे, जनता भी मौन साध ले तो उसमें विरोधी पक्ष क्या कर सकता है। कांग्रेस को विपक्ष के रूप में कमजोर करना और संविधान को कमजोर करना लोकतंत्र को कमजोर करना है। जब तक जनता और संवैधानिक संस्थाएं कांग्रेस के पक्ष में खड़ी नहीं होंगी, हमारा लोकतंत्र कमजोर हो जाएगा।
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