ग्रुप कैप्टन की अंतिम विदाई भोपाल में होगी: कल आएगी जवान की पार्थिव देह; बच्चों के चहेते थे वरुण, रिटायरमेंट के बाद खेती करने का था सपना
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- Whenever He Came To Bhopal, Giving Career Tips To The Children Of The Colony, He Used To Encourage Them By Telling The Story Of The Warriors.
नीलेन्द्र पटेल, भोपाल/ सुमित विशेन, देवरियाएक घंटा पहले
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तमिलनाडु के कन्नूर में 8 दिसंबर को CDS जनरल बिपिन रावत के हेलिकॉप्टर हादसे के इकलौते घायल ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह का बुधवार को निधन हो गया। वरुण पिछले 7 दिन से बेंगलुरु के अस्पताल में जिंदगी के लिए संघर्ष कर रहे थे।
भोपाल कलेक्टर अविनाश लवानिया ने बताया कि शहीद ग्रुप कैप्टन का अंतिम संस्कार शुक्रवार को भोपाल में होगा। उनकी पार्थिव देह गुरुवार दोपहर 2:30 बजे सेना के विमान से भोपाल पहुंच जाएगी। एयरपोर्ट रोड सनसिटी कॉलोनी में श्रद्धांजलि कार्यक्रम रखा जाएगा। शुक्रवार को सुबह 11:00 बजे भदभदा विश्राम घाट पर अंतिम संस्कार किया जाएगा। अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए उनके गृह जिले देवरिया (उत्तर प्रदेश) से भी परिवार के लोग भोपाल के लिए रवाना हो गए हैं।
भोपाल में ही रहते हैं शहीद के पिता
शहीद वरुण के पिता और सेना के रिटायर्ड कर्नल केपी सिंह भोपाल के एयरपोर्ट रोड स्थित सन सिटी कॉलोनी में ही रहते हैं। वरुण भी अक्सर भोपाल आते-जाते थे। हालांकि, वरुण सिंह के परिवार का कोई भी सदस्य अभी यहां नहीं है और घर में ताला लगा हुआ है।
भास्कर ने वरुण के भोपाल स्थित घर और उनके गृहक्षेत्र देवरिया के लोगों से मिलकर उनकी भावनाएं जानीं। दोनों जगह मातम पसरा हुआ है। दोनों जगह एक ही बात निकल कर आई कि वरुण बच्चों के बीच बहुत लोकप्रिय थे। करियर टिप्स देते थे। योद्धाओं के किस्से सुनाया करते थे।
दिवाली में भोपाल आए थे वरुण ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह के पड़ोसी और सन सिटी उत्सव समिति कॉलोनी भोपाल के अध्यक्ष दलजीत सिंह गुरुदत्ता ने बताया कि वरुण अभी दिवाली में घर आए थे। वह बहुत मिलनसार थे। पूरी काॅलोनी के वह चहेते थे। कॉलोनी के बच्चों से वह बहुत दुलार करते थे। जब कभी आते तो सभी बच्चों से मिलते। उनकी हौसलाअफजाई करते। साथ ही बच्चों से उनके लक्ष्य के बारे में पूछते, फिर उन्हें करियर टिप्स देते थे। जब भी वह आते थे, कॉलोनी में उत्सव जैसा माहौल रहता था। उनकी मौत की खबर सुनकर बहुत दुख हुआ।
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एक प्रोग्राम के दौरान बच्चों के साथ दिवंगत वरुण सिंह। (फाइल फोटो)
छुटि्टयों को भी देश के लिए समर्पित करते थे वरुण
भोपाल में वरुण के पड़ोसी अनिल मूलचंदानी ने बताया कि वरुण को जब भी छुट्टी मिलती थी, वे भोपाल आते थे। भोपाल शहर उन्हें काफी पसंद था। कॉलोनी में जब टहलते थे, तब बच्चों से लेकर बड़ों तक से बात करते थे। वे बच्चों को योद्धाओं की कहानियां बताते थे। बच्चे फिर ये कहानियां हमें बताते थे। वरुण सिंह हमेशा बच्चों में साहस भरते थे। वे छुटि्टयों के दिनों को भी देश के लिए समर्पित करते थे। लड़कियों को भी प्रोत्साहित करते थे। वे कहते थे कि लड़कियां किसी से कम नहीं हैं।
विश्वास नहीं रहा कि वरुण अब नहीं रहे
वरुण के पड़ोस में रहने वाले कर्नल महेंद्र त्यागी ने कहा- वरुण सिंह के जाने से हम सभी शोक में हैं। वे बड़े पराक्रमी थे, लेकिन हमें छोड़कर चले गए। वरुण के पिता मेरे अच्छे दोस्त हैं। वरुण के बारे में कुछ दिन पहले ही उनसे बात हुई थी। उन्होंने कहा था कि अभी बेटा अच्छा है। आज वरुण के निधन की दुखद खबर मिली है। हमें विश्वास नहीं हो रहा है कि वरुण अब हमारे बीच नहीं रहे।
भाई नौसेना में तैनात
करीब 20 साल पहले वरुण सिंह का परिवार भोपाल शिफ्ट हो गया था। सन सिटी कॉलोनी में उनके पिता केपी सिंह और मां उमा सिंह रहते हैं। वहीं, वरुण सिंह अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ तमिलनाडु के वेलिंगटन में रहते थे। उनके छोटे भाई तनुज नौसेना में लेफ्टिनेंट कमांडर हैं, उनकी पोस्टिंग मुंबई में है। वर्तमान में मां उमा सिंह छोटे भाई के साथ रह रही हैं। मां निजी स्कूल में टीचर थीं।
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देवरिया : रिटायर्ड होने के बाद खेती करना चाहते थे
उधर, देवरिया के कन्हौली गांव से रिश्तेदार भोपाल आ रहे हैं। कन्हौली वरुण सिंह का पैतृक गांव है। जहां मातम पसरा है। भास्कर से चर्चा करते हुए चाचा राजीव सिंह ने बताया कि अधिकारी थे, लेकिन सामान्य जीवन जीते थे। रिटायर्ड होने के बाद गांव में ही खेती करना चाहते थे। गांव में बनी चिनिया मिठाई, गट्टा और गुड़ का मीठा पसंद था। कहते थे- जय जवान जय किसान वाला जीवन पसंद है।
अभिनंदन के बैचमैट थे ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह
ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह ग्रुप कैप्टन अभिनंदन वर्तमान के बैचमैट रहे हैं। अभिनंदन वर्तमान ने ही 27 फरवरी 2019 को भारत की सीमा में घुसे पाकिस्तानी विमानों को खदेड़ा था। ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह डीएसएससी में पदस्थ होने के चलते उनका पूरा परिवार तमिलनाडु में रहता है। ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह, कांग्रेस नेता और प्रवक्ता अखिलेश प्रताप सिंह के भतीजे हैं।
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